
21 June 2026
आज दिनांक 21 जून 2026 को आर्य महिला पी. जी. कॉलेज शाहजहांपुर में शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के क्रम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन प्राचार्य प्रो. सुरचना त्रिवेदी जी की अध्यक्षता में प्रातः आठ बजे किया गया।
आज दिनांक 21 जून 2026 को आर्य महिला पी. जी. कॉलेज शाहजहांपुर में शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के क्रम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन प्राचार्य प्रो. सुरचना त्रिवेदी जी की अध्यक्षता में प्रातः आठ बजे किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि योग प्रशिक्षक श्रीमती गीता पांडेय, श्रीमती अर्चना दीक्षित, एवं विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा की उप प्रधान श्रीमती गायत्री दीक्षित जी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ योग साधकों,अतिथियों एवं प्राचार्य जी द्वारा मां सरस्वती जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण करके किया गया ।ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥"इस उद्बोधन के साथ , हम अपने मुख्य योगाभ्यास की ओर बढ़ते हैं। आइए, एक नए संकल्प के साथ 'Yoga for Healthy Aging' इस साल की आधिकारिक थीम पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्य प्रो. सुरचना त्रिवेदी जी ने अपने विचारों से सभी को प्रेरित करते हुए कहा यह समस्त भारतीयों के लिए गौरव का विषय है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी की पहल पर 184 से अधिक देशों में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है योग के द्वारा हम अपने अंतर्मन को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ते हुए अपनी कार्य संस्कृति के प्रति ईमानदार रहे आपसी सामंजस्य और सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें यही योग दिवस को मनाने की सार्थकता को व्यक्त करता है।योग गुरु श्री राजेश दीक्षित जी ने छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारी गण को योग दिवस 2026 के मुख्य कार्यक्रम में 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' (CYP) के बिषय में बताया , जो लगभग 45 मिनट का होता है।यह प्रोटोकॉल प्रार्थना से शुरू होकर शारीरिक और मानसिक संतुलन, लचीलेपन और शांति के लिए विभिन्न आसनों व प्राणायामों का एक वैज्ञानिक क्रम है। योग के विभिन्न आसनों भुजंगासन, वृक्षासन, उत्कटासन, ताड़ासन, पद्मासन,मकरासन ,वज्रासन एवम प्राणायाम कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, शीतली और अंत में ध्यान व संकल्प,आदि का अभ्यास कराया।उन्होंने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए योग की विभिन्न मुद्राएं और आसन उपयोगी हैं।इनसे न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है।
अपने वक्तव्य में योग गुरु श्रीमती गीता पांडेय जी ने कहा कि योग आसनों का अभ्यास करने से ताकत और लचीलापन विकसित होता है, साथ ही आपकी नसों को आराम मिलता है और आपका मन शांत होता है। आसन मांसपेशियों, जोड़ों और त्वचा पूरे शरीर - ग्रंथियों, नसों, आंतरिक अंगों, हड्डियों, श्वसन और मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। श्रीमती कमलेश मिश्रा जी ने कहा कि योग शारीरिक स्तर पर शक्ति, सहनशक्ति, धीरज और उच्च ऊर्जा के विकास में मदद करता है। यह मानसिक स्तर पर बढ़ी हुई एकाग्रता, शांति और संतोष के साथ खुद को सशक्त बनाता है जिससे आंतरिक और बाहरी सामंजस्य स्थापित होता है।
अपने विचारों को प्रेषित करते हुए योग गुरु श्रीमती कमलेश मिश्रा जी ने कहा कि योग का मुख्य उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार है, जो सभी दुखों से मुक्ति और स्वतंत्रता की ओर ले जाता है। योग का अभ्यास शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करता है, जिससे समग्र कल्याण प्राप्त होता है।
इसी श्रृंखला में अपने वक्तव्य में सुश्री ऋतु शर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा विभाग) ने बताया कि योग के आठ अंग कहे जाने वाले आठ नियम हैं। इनका अभ्यास करने से मन शांत होता है।इनमें यम (नैतिक अनुशासन), नियम (आत्म-अनुशासन), आसन (मुद्राएँ), प्राणायाम (साँस लेना), प्रत्याहार (अलगाव), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (ध्यान और चिंतन) और समाधि (ईश्वर के साथ एकता) शामिल हैं।कार्यक्रम का संचालन डा रानू दुबे द्वारा किया गया।
अंत में प्राचार्य प्रो सुरचना त्रिवेदी जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर प्रो. रूपांशु माला, डॉ. स्वेता सक्सेना , डॉ एम पी एस चौहान, डॉ विजय गुप्ता, डॉ आशीष गोयल,श्रीमती रितु मिश्रा, डॉ उपासना श्रीवास्तव, डॉ ज्योति गुप्ता, डॉ मनोरमा शुक्ला, डॉ अरुण कांत पांडेय, डॉ उमेश भारती, डॉ मृदुल शुक्ला, डॉ निदा शाहिद, डॉ गुलशन रस्तोगी, श्री राजेश, श्री भावेश मिश्रा , श्रीमती शैली पाठक, सुश्री शालिनी, सुश्री शेशाकी, सुश्री संध्या भारती, श्रीमती सुनीता शर्मा, श्रीमती रंजीता अवस्थी, अरविंद अवस्थी, राधा रमण मिश्रा, अनिल सिंह, नरेंद्र पाल सक्सेना, धर्मपाल, हिमांशु, राकेश , सुधीर एवं बड़ी संख्या में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं आर्या रेंजर्स की स्वयंसेविकाओं , छात्राओं के साथ महविद्यालय के सभी सदस्यों ने प्रतिभागिता की।






